यादें तेरी लाया हूँ

राहों के सुखे फूल सही,
मैं तेरे लिए ही लाया हूँ ।

कुछ भूली बिसरी याद वही,
मैं सब चुन चुन कर लाया हूँ ।

बीतें हर साल जो मिनटों -से,
उनकी हर रात को लाया हूँ ।

सावन के झूलों की रस्सियां,
डब्बे में भर कर लाया हूँ ।

नन्हे पावों की तेरी चप्पलें,
मैं बढ़ते क्रम में लाया हूँ ।

तेरे भूले वो दोस्त तेरे,
मैं ढूंढ उन्हें भी लाया हूँ ।

वो मासी-मामा,नानी-नाना
वो दूर के रिश्तेदारों को,
वो गोद मे जिसकी खूब थे खेले,
मैं सबकी यादें लाया हूँ ।

पेंसिल, रबर व कटर सहित,
तेरा वो बैग भी लाया हूँ ।

वो जिस पर तूने खूब था घुमा,
गली गली और चौक मुहल्ले,
वो दो चक्कों की तेरी जान,
साईकल भी तेरी लाया हूँ ।

तेरी स्कूल की वो डायरी,
जो घरवालों से छिपाता था,
अब धूल लगी है उसमें भारी,
मैं ढूंढ उसे भी लाया हूँ ।

कुछ और भी लाने को चाहा,
पर मिला नही मैं क्या करता,
तेरे सब वस्तु मिल ही गए,
पर बचपन तेरा मिला नहीं ।।

©indianbard

5 Comments

  1. क्या खूब लिखा है बेहतरीन रचना।👌👌
    राहों के सुखे फूल सही,
    मैं तेरे लिए ही लाया हूँ ।

    कुछ भूली बिसरी याद वही,
    मैं सब चुन चुन कर लाया हूँ ।

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