Sher-O-Shayari


कभी हम न कहेंगे हाल-ए-दिल,बस आँखों में पढ़ लेना तुम ।जो बात ज़ुबान पर रूकती नहीं,बस आँखों से कह देना तुम ।। Though I will never say what stays in my heart,just try to read it through my eyes.The thoughts of your heart that you can't express,just try to tell me through your eyes.

Sher-O-Shayari


"न ज़मीं को तेरे, न आसमां को तेरे, न आबो- हवा, न शानो- शौक़त को तेरे । मिल गयी है जो ख़ाक में तुझे पाते-पाते,फिर तरसती है आलिंगन को तेरे ।। " Translation: Neither for the land of your existence, nor for your charm,Neither for your possessions, nor for royal lifestyle.The love which has already… Continue reading Sher-O-Shayari

Main – ओस की एक बूँद


धर्म और तहज़ीब की अदालत है और फिर एक फिसलती जान है। ख़्वाब बंद आँखों में हिचकोले खाते है, और आँख खुलते ही ओझल हो जाते है। मैं ओस की बूँद ही तो हूँ, सुबह घासों की एक परत से चिपका रहता हूँ आँखें खुलती नहीं कि बंद हो जाती है। चारों तरफ़ दीवारें है,… Continue reading Main – ओस की एक बूँद

हर सुबह धूप नहीं होती मगर सूरज निकलता है


कभी ख़ुशी से आँखें खोले और इस दुनिया को एक बार फिर नयी तरह से देखें। संभव है? क्यूँ नहीं। मगर, फिर आशाओं की बरसात भी तो होनी है। हम भीगेंगे उस में; नहाएँगे; और फिर कल का सोच-सोचकर आज दुखी हो जाएँगे। मुमकिन है हम ज़्यादा सोचे और भूल जाएँ की कल फिर सुबह… Continue reading हर सुबह धूप नहीं होती मगर सूरज निकलता है

मुसाफ़िर


ख़ुश्बू, ख़्वाब, ख़बर, या ख़त हो, कुछ तो रखकर भेज मुसाफ़िर। अब तक काली रात रही है, सुबह हुई पट खोल मुसाफ़िर।। Smell, dream, news, or a letter, Send something o’ traveler. It has been a dark night so far, Open the door it’s morning already.

जो चौखट लाँघ परिंदा


जो चौखट लाँघ परिंदा आज यहाँ से जाएगा, फिर झूठी-जूठी खाने को वापस न आने पाएगा, समय-समय जो आँखें खोले मूँद नहीं फिर पाएगा,

उन तस्वीरों में कुछ रंग शायद बाक़ी-सा है


उन तस्वीरों में कुछ रंग शायद बाक़ी-सा है, दिलों पर सिरों का बोझ भी तनिक भाड़ी-सा है, साँस शब्दों के उलझनों से आज़ाद कहाँ है, गलियों में कोई मिलनसार कहाँ है,

चल आज वहाँ हम जंग करें ।


आँखों में आँखे डाल कर, सूरज से भी, गगन से भी, नीर, अग्न, पवन से भी, जहाँ मृत हमारी काया हो, चल आज वहाँ हम जंग करें ।

बड़ा अडिग है


बड़ा अडिग है, भिमकायसीने पर साँप सा भारी,खोने की खाँचों में बैठा,एक ख़ाक  बड़ा अभिमानी,वो सत में एक झूठ सा बैठा,झुठों में सतज्ञानि । आँखों से ओझल रहता है,पर दिमाग़ पर भाड़ी,सभी शब्दों में छिपा है जैसे,तेल पर तैरता पानी । जो कंकर को मोती कर दे,करुणा, प्रेम की छाया,जो हम-तुम को दूषित कर दे,द्वेष,… Continue reading बड़ा अडिग है