समझौता

कर ही लेते है समझौता,
कल का भी, आज का भी,
और हमारे आने वाले कल का भी,

बीते दिनों की यादें अब मेरी,
आने वाले कल की खुशियाँ अब तेरी ।।

कुछ सपने जो देखें थे, वो मेरे
और शहनाईयों की गूँज, अब तेरी ।

तेरे किस्से सब मेरे,
और मै अजनबी बन तेरा ।

राहों की हर मुश्किलें अब मेरी,
फूलों के गुलदस्ते अब तेरे ।

तन्हां रातें अब मेरी,
ये पूनम का चांद अब तेरा ।

तेरी आत्मा अब मेरी,
तेरा शरीर अब तेरा ।

वो सीने में सुलगती चिंगारी अब मेरी,
वो धड़कता दिल अब तेरा ।

वो तुझे पाने की अधूरी चाह अब मेरी,
और वो जीने का हक़, अब तेरा ।

वो धड़कनों का बोझ अब मेरा,
वो उम्मीदों से भरा जीवन अब तेरा ।

वो भटकता भवर अब मेरा,
ये सुनहरा पथ अब तेरा ।

वो छोटा सा कूचा अब मेरा,
वो सजा मकान अब तेरा ।

अलविदा कहने का हक़ अब मेरा,
सिर झुका कर जाना अब तेरा ।

ये रास्ता अब मेरा,
वो रास्ता अब तेरा ।।

©nawaab

रौशनदान

रौशनदान से आती किरणे,
सपनों से जगाती है,
ये अन्वेषी आँखें,
खड़ी हो रौशनदान को ताकती है,
मेरा तन मिट्टी की सरोह में है,
क्षमता से छिन्न हुँ,
और लाचार बिना कदमों के,
तंग जमाने के सूरते हाल को देखता हूँ,
कभी नामवर को देखता हूँ ,
कभी यायावर को देखता हूँ ।
कभी खिड़कियों से गुज़रती हवाएँ कह जाती है ,
उठ ओ लंगड़े दाव लगा जा,
जी के नहीं तो मर के दिखा जा,
बहोत सो लिये चार पायो में,
चल आगे कुछ कर के दिख जा ।
उठ कर हौशले से जो चाहु,
हौशले संग फिर गिरजाता हुँ,
आँखे बंद कर वहीं सो जाता हूँ ।
अगले दिन जब फिर जग जाता हूँ,
फिर ज़िन्दगी यही किस्सा दोहराती है,
रौशनदान आती किरणे,
जब सपनों से जगाती है ।।

©nawaab

The prayer to be healed

The valley in the mountains,

Let me breathe, I ran a lot,

On the ups and down,

For the love of others.

In the search of cures,

I fought, I ran, Now tired.

Let me feel these, the sun,

the flowers, the birds around,

they heal, for sure, my lengthy and broken heart, in pieces they are,

let them be together.

Heal me O sun, the moon, and all the Almighty’s creations,

I know, You know, the treatment, be the cure, make me laugh.

You do it for all, do it for me once,

Let me breathe your holy creations.

Let me be healed, in the world of wounds.

जगह तो बहुत है

जगह तो बहुत है मेरे दिल में,

यहाँ राम भी बस्ते है,

रहमान भी बस्ते है ।।

जगह तो बहुत है मेरे कूचे में,

नमाज़ भी पढ़ लेता हूँ,

पूजा भी कर लेता हूँ ।।

जगह तो बहुत है मेरे शहर में,

मंदिरों की घंटियाँ भी बजा लेता हूँ,

मस्जिदों में सज़दा भी कर लेता हूँ ।।

जगह तो बहुत है मेरे देश में,

दीवाली की मिठाइयाँ भी खा लेता हूँ,

ईंद की सेवैयाँ भी खा लेता हूँ ।।

जगह तो बहुत है इस दुनिया में,

धर्म के नाम पर मिलने वाले से भी मिल लेता हूँ,

धर्म को न मानने वाले से भी मिल लेता हूँ ।।

एक ख़त

एक ख़त में गुम थे कई जज़्बात,

तुम्हें भेज रहा हूँ |

तुम्हारी यादों के कुछ नगीने ,

तुम्हें भेज रहा हूँ ।

सर्द हवाओं की वो अंगड़ाइयाँ

कही दफ़्न न हो जाए

वो हर्फ़-ए-जवानी,

तुम्हें भेज रहा हूँ ।

बादलों की ये उमड़ जो यहाँ है,

वहाँ भी तो होंगी

चांदनी रातों को जलानेवाली ये चिंगारी,

तुम्हें भेज रहा हूँ ।

वक़्त के हालातों से घिस गयी है ये रूह,

इस बेजान सी जान को,

तुम्हें भेज रहा हूँ ।

न शान-ओ-शौक़त का इरादा था,

न ऐसे सोहरत से कोई वास्ता है,

बड़ी खूबसूरती से संभाला है जिसे,

तेरी यादों की वो दौलत,

तुम्हें भेज रहा हूँ ।।