मृगतृष्णा

आग है, इक आग है,
जो दर्द की हुँकार है,
जलते जहाँ ग़म थे कभी,
अब जल रहें इंसान है ।।

सोच

एक सोच क़हर है ढाने को, एक सोच है जीवन पाने को, लड़ना हर बात पर सोच है, एक सोच है प्यार फैलाने को । पत्थर की मूरत सोच है, मूरत, एक पत्थर, सोच । है सोच के अब तू हार गया, एक सोच है हारा पाने को ।। दिन का होना एक सोच है,Continue reading “सोच”