उन तस्वीरों में कुछ रंग शायद बाक़ी-सा है

उन तस्वीरों में कुछ रंग शायद बाक़ी-सा है, दिलों पर सिरों का बोझ भी तनिक भाड़ी-सा है, साँस शब्दों के उलझनों से आज़ाद कहाँ है, गलियों में कोई मिलनसार कहाँ है,