मृगतृष्णा

आग है, इक आग है,
जो दर्द की हुँकार है,
जलते जहाँ ग़म थे कभी,
अब जल रहें इंसान है ।।

यादें तेरी लाया हूँ

राहों के सुखे फूल सही, मैं तेरे लिए ही लाया हूँ । कुछ भूली बिसरी याद वही, मैं सब चुन चुन कर लाया हूँ । बीतें हर साल जो मिनटों -से, उनकी हर रात को लाया हूँ । सावन के झूलों की रस्सियां, डब्बे में भर कर लाया हूँ । नन्हे पावों की तेरी चप्पलें,Continue reading “यादें तेरी लाया हूँ”