चल आज वहाँ हम जंग करें ।

आँखों में आँखे डाल कर,
सूरज से भी, गगन से भी,
नीर, अग्न, पवन से भी,
जहाँ मृत हमारी काया हो,
चल आज वहाँ हम जंग करें ।

मेरी मिट्टी में समलित तू,
और तेरी चीता की छाया मैं,
आ अपना अपना हिसाब करें,
तू मुझमें आ मैं तुझमें आऊँ,
समय, समय से जहाँ लड़ता,
चल आज वहाँ हम जंग करें ।

है तिरस्कृत मेरा सिर,
तेरा सम्मान भी झूठा है,
चल दोनो नग्न, नतमस्तक हो,
इस धरा को साफ़ करें,
तू अपना लहू दे मुझे पिला,
मेरा हर क़तरा तू पी ले,
जहाँ कभी भी गहरी रात न हो,
चल आज वहाँ हम जंग करें ।।


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