मुसाफ़िर

ख़ुश्बू, ख़्वाब, ख़बर, या ख़त हो, कुछ तो रखकर भेज मुसाफ़िर। अब तक काली रात रही है, सुबह हुई पट खोल मुसाफ़िर।। Smell, dream, news, or a letter, Send something o’ traveler. It has been a dark night so far, Open the door it’s morning already.

जो चौखट लाँघ परिंदा

जो चौखट लाँघ परिंदा आज यहाँ से जाएगा, फिर झूठी-जूठी खाने को वापस न आने पाएगा, समय-समय जो आँखें खोले मूँद नहीं फिर पाएगा,

चल आज वहाँ हम जंग करें ।

आँखों में आँखे डाल कर, सूरज से भी, गगन से भी, नीर, अग्न, पवन से भी, जहाँ मृत हमारी काया हो, चल आज वहाँ हम जंग करें ।

बड़ा अडिग है

बड़ा अडिग है, भिमकायसीने पर साँप सा भारी,खोने की खाँचों में बैठा,एक ख़ाक  बड़ा अभिमानी,वो सत में एक झूठ सा बैठा,झुठों में सतज्ञानि । आँखों से ओझल रहता है,पर दिमाग़ पर भाड़ी,सभी शब्दों में छिपा है जैसे,तेल पर तैरता पानी । जो कंकर को मोती कर दे,करुणा, प्रेम की छाया,जो हम-तुम को दूषित कर दे,द्वेष,… Continue reading बड़ा अडिग है

Poem Excerpts : यादें तेरी लाया हूँ ।

राहों के सुखे फूल सही,मैं तेरे लिए ही लाया हूँ । कुछ भूली बिसरी याद वही,मैं सब चुन चुन कर लाया हूँ । बीतें हर साल जो मिनटों -से,उनकी हर रात को लाया हूँ । सावन के झूलों की रस्सियां,डब्बे में भर कर लाया हूँ । नन्हे पावों की तेरी चप्पलें,मैं बढ़ते क्रम में लाया… Continue reading Poem Excerpts : यादें तेरी लाया हूँ ।

क़िस्मत के तराने

कितने दूर है, न जाने कहाँ है, मेरी क़िस्मत के तराने, किस गफ़लत में गुम है ।   न कोई आस, न उम्मीद में है, वो दूर कहीं ख़ुद ख़ाक में गुम है ।   एक प्यास जो इधर लिए बैठा हूँ, जिस तड़प में मन हिरण बन फिरता है ।   क्यूँ रात भी… Continue reading क़िस्मत के तराने

मृगतृष्णा

आग है, इक आग है, जो दर्द की हुँकार है, जलते जहाँ ग़म थे कभी, अब जल रहें इंसान है ।।