चल आज वहाँ हम जंग करें ।

आँखों में आँखे डाल कर,
सूरज से भी, गगन से भी,
नीर, अग्न, पवन से भी,
जहाँ मृत हमारी काया हो,
चल आज वहाँ हम जंग करें ।

बड़ा अडिग है

बड़ा अडिग है, भिमकायसीने पर साँप सा भारी,खोने की खाँचों में बैठा,एक ख़ाक  बड़ा अभिमानी,वो सत में एक झूठ सा बैठा,झुठों में सतज्ञानि । आँखों से ओझल रहता है,पर दिमाग़ पर भाड़ी,सभी शब्दों में छिपा है जैसे,तेल पर तैरता पानी । जो कंकर को मोती कर दे,करुणा, प्रेम की छाया,जो हम-तुम को दूषित कर दे,द्वेष,Continue reading “बड़ा अडिग है”

Poem Excerpts : यादें तेरी लाया हूँ ।

राहों के सुखे फूल सही,मैं तेरे लिए ही लाया हूँ । कुछ भूली बिसरी याद वही,मैं सब चुन चुन कर लाया हूँ । बीतें हर साल जो मिनटों -से,उनकी हर रात को लाया हूँ । सावन के झूलों की रस्सियां,डब्बे में भर कर लाया हूँ । नन्हे पावों की तेरी चप्पलें,मैं बढ़ते क्रम में लायाContinue reading “Poem Excerpts : यादें तेरी लाया हूँ ।”

क़िस्मत के तराने

कितने दूर है, न जाने कहाँ है, मेरी क़िस्मत के तराने, किस गफ़लत में गुम है ।   न कोई आस, न उम्मीद में है, वो दूर कहीं ख़ुद ख़ाक में गुम है ।   एक प्यास जो इधर लिए बैठा हूँ, जिस तड़प में मन हिरण बन फिरता है ।   क्यूँ रात भीContinue reading “क़िस्मत के तराने”

मृगतृष्णा

आग है, इक आग है,
जो दर्द की हुँकार है,
जलते जहाँ ग़म थे कभी,
अब जल रहें इंसान है ।।

अब कहाँ विकट अँधेरे में

अब कहाँ विकट अँधेरे में,
उजाले ढूंढ़ा करते हो ।
फिर आश बढ़ा उन लासों में,
इन्सानियत ढूंढ़ा करते हो ।
बुनियाद बानी थी फूसों की,
महलों को ताका करते हो ।
फिर आज घने अँधेरे में ,
राहों को देखा करते हो ।

महसूस होती है ।।

वो जो इश्क़ में महसूस होती थी,
है कहीं जो जल रही है,
महसूस होती है ।।

अपनी अदालत में खड़ी होकर,
अपनी सजा की गुहार लगाती,
एक तड़प की तपिश भी,
महसूस होती है ।।