हर सुबह धूप नहीं होती मगर सूरज निकलता है

कभी ख़ुशी से आँखें खोले और इस दुनिया को एक बार फिर नयी तरह से देखें। संभव है? क्यूँ नहीं। मगर, फिर आशाओं की बरसात भी तो होनी है। हम भीगेंगे उस में; नहाएँगे; और फिर कल का सोच-सोचकर आज दुखी हो जाएँगे। मुमकिन है हम ज़्यादा सोचे और भूल जाएँ की कल फिर सुबह… Continue reading हर सुबह धूप नहीं होती मगर सूरज निकलता है

मुसाफ़िर

ख़ुश्बू, ख़्वाब, ख़बर, या ख़त हो, कुछ तो रखकर भेज मुसाफ़िर। अब तक काली रात रही है, सुबह हुई पट खोल मुसाफ़िर।। Smell, dream, news, or a letter, Send something o’ traveler. It has been a dark night so far, Open the door it’s morning already.